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और ये ढोंग जरूरी भी है

‘My Tukbandi’ के सभी लेखकों एवं पाठकों को हमारा प्यार भरा नमस्ते.

दोस्तों, जैसा कि सभी को ज्ञात होना चाहिए (क्यों कि ये एक सामान्य ज्ञान की बात है), प्रेम-सप्ताह प्रारम्भ होने को है. और प्रारंभ होने को है प्रतीक्षाएं, प्रेरणाएं, पीड़ाएं, आहटें, दस्तकें, रौनकें, मिलन, आलिंगन, बिछुड़न, चुम्बन, ज्वालाएं, राहतें इत्यादि इत्यादि, क्योंकि ये सब प्रेम ही के अभिन्न अंग है. और ये सब साहित्य का भी अहम हिस्सा है. प्रेम भी तो सीधा साहित्य से जुड़ा है. हालांकि प्रेम सीधा सामाजिक व्यवस्था से भी जुड़ा है, और साहित्य भी तो समाज में घुला-मिला है. कुल मिलाकर बात ये है कि प्रेम, साहित्य और समाज का एक अद्भुत तालमेल है जो प्रेम-पंछियों को सिखाता है विभिन्न प्रकार (प्रतीक्षाएं, प्रेरणाएं, पीड़ाएं…) की भावनाओं के साथ तथाकथित आग के दरिया में गोते लगाना.

अतः इस ख़ास मौके पर हम हमारे लेखकों से निवेदन करते हैं कि वो अपने प्रेम के किस्से कविता/कहानी/लेख के माध्यम से हमारे पाठकों तक पहुंचाएं. और पाठकों को हम आमंत्रित करते हैं हमारे प्रकाशन से लेखक के रूप में जुड़ने के लिए.

धन्यवाद्

Rajendra Nehra

Editor, My Tukbandi

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इस वेलेंटाइन सप्ताह को हिंदी प्रेम-कविताओं के साथ मनाएं

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मेरी प्रेयसी

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International Tea Day

हालाँकि ये सावन का महिना नहीं है, लेकिन फिर भी ये पुरानी कविता मैंने साझा की है क्यों कि अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस के मौके पर खुद को रोक नहीं पाया.

Rajendra Nehra

The author of 'My Tukbandi'

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